धर्म के नाम पर भेद भाव:

जब भी देश में प्रदूषण के बरे में बात होती है तो हिंदू समाज में सर्वश्रेष्ठ त्योहार के लिए बहूत सारे बुद्धि जीवी खड़े हो जाते हैं और कहते हैं पटाखे नहीं जलाने चाहिए इससे शोर प्रदूषण होता है प्रदूषण होता है और सबसे ज्यादा वो लोग बोलते हैं जो खुद सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं आप के बारे में बात कर रहा हूं और जब दिवाली आती है तो सब ज्ञान देना शुरू कर देते हैं पर जब इनके त्योहर आते हैं तो सब सैकुलर हो जाते हैं जब किसी को शोर प्रदूषण और जो गलियों में गंदगी फैलती है तो वो सब चुप हो जाते हैं तब वो सेक्‌यलरिज़म् की दुहाई देते हैंऔर हमारे जो दोगले नेता है वो भी इसके बारे में कुछ नहीं बोलते और अगर इनहे कोई बोलो ये मत करो तो इनका धर्म सबसे ऊपर और इसके लिए ये किसी की हत्या करते हुए भी नहीं सोचते हैं उदाहरण के लिए कमलेश तिवारी जिस्का गला काट दिया गया था 1 छोटी सी टिप्नि के बाद अगर ऐसा ही चलता रहा तो वो दिन दूर नही जब ऐक बारी फिर धर्म के नाम पर दंगे देखने को मिलेंगे.

सांप्रदायिक हिंसा

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